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एक अनजानी कशिश

आयशा अपने छोटे से अपार्टमेंट के लिविंग रूम में लगातार इधर-उधर टहल रही थी। उसके सीने में एक अजीब सी बेचैनी थी, एक ऐसी घुटन जिसे वह किसी भी शब्द में बयां नहीं कर सकती थी। बाहर खिड़की के पार, शहर की लाइफ अपनी फुल स्पीड पर चल रही थी। गाड़ियों के हॉर्न, दूर बजता हुआ कोई लाउड म्यूजिक, लोगों की चहल-पहल और नियॉन लाइट्स की चमक... सब कुछ अपनी जगह पर बिल्कुल नॉर्मल था। लेकिन उस छोटे से कमरे के अंदर, आयशा के लिए हर एक पल बहुत भारी और मुश्किल लग रहा था।

उसे हमेशा से ही ऐसा फील होता था, जैसे वह इस जगह से, इस शहर से, या शायद इस दुनिया से बिलॉन्ग ही नहीं करती। बचपन से ही एक अजीब सा अकेलापन उसके साथ-साथ चलता था। जैसे कोई पज़ल का पीस हो, जो गलत बॉक्स में आ गया हो। उसके दिल में हमेशा एक अनजानी सी कशिश महसूस होती थी, एक ऐसा पुल जो उसे किसी ऐसी चीज़ की तरफ खींचता था जिसका उसे खुद कोई अंदाज़ा नहीं था। वह अक्सर रातों को जागकर तारों को देखती और सोचती कि आखिर यह अजीब सी फीलिंग क्या है।

उसकी लाइफ का डेली रूटीन बहुत ही बोरिंग और प्रेडिक्टेबल था। शहर के एक पुराने इलाके में मौजूद एक छोटी सी बुकस्टोर में वह काम करती थी। वह बुकस्टोर उसकी दुनिया का इकलौता ऐसा हिस्सा था, जहाँ उसे थोड़ी बहुत शांति मिलती थी। किताबों के बीच रहना, पुरानी पन्नों की वो सोंधी सी महक, और फिक्शन कहानियों में खो जाना, यही उसका एस्केप था। लेकिन अब वह जॉब भी उसे डल और मोनोटोनस लगने लगी थी। सुबह उठो, स्टोर जाओ, किताबें अरेंज करो, कस्टमर्स को अटेंड करो और वापस अपने इस खाली अपार्टमेंट में आ जाओ।

सोशल लाइफ के नाम पर उसके पास कुछ भी नहीं था। ना कोई क्लोज फ्रेंड सर्कल, ना ही कोई वीकेंड पार्टीज। जो थोड़े बहुत पल वह अकेलेपन में एन्जॉय करती थी, अब वो पल भी बहुत फ्रैजाइल और कमज़ोर लगने लगे थे। ऐसा लगता था जैसे बाहर की दुनिया उसे किसी ऐसी दिशा में बुला रही है, जिसे समझने की समझ या ताकत उसमें अभी नहीं थी। एक अजीब सी आवाज़, जो कानों में नहीं बल्कि सीधे उसके दिमाग और दिल में गूंजती थी।

चलते-चलते वह अचानक रुकी और अपने बेडरूम के पुराने शीशे के सामने जाकर खड़ी हो गई। शीशे में दिखने वाला अक्स उसका अपना था, लेकिन आँखों में एक गहरी उदासी और कन्फ्यूज़न साफ़ झलक रहा था। डार्क सर्कल्स और बिखरे हुए बाल उसकी रातों की नींद की कहानी बता रहे थे।

"मैं इतनी खोई हुई क्यों महसूस करती हूँ?" आयशा ने अपनी ही परछाई को देखते हुए एक गहरी सांस ली और बहुत ही धीमी आवाज़ में फुसफुसाई। यह सवाल उसने खुद से हज़ारों बार पूछा था, लेकिन जवाब में उसे सिर्फ कमरे का सन्नाटा ही वापस मिलता था। उसे लगता था जैसे वह अपनी ही लाइफ में एक साइड कैरेक्टर है, और उसकी असली कहानी कहीं और, किसी और दुनिया में उसका इंतज़ार कर रही है।

ह्यूमन वर्ल्ड की इस भागदौड़ और शोर-शराबे से मीलों दूर, स्पेस और टाइम के पार, एक बिल्कुल ही अलग डायमेंशन मौजूद था। एक ऐसी दुनिया जहाँ साइंस नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ मैजिक का राज था। मैजिकल वर्ल्ड। यह दुनिया जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही मिस्टीरियस और खतरनाक भी।

अहान एक बहुत ही विशाल और प्राचीन मंदिर के बीचों-बीच खड़ा था। यह कोई आम मंदिर नहीं था। इसकी ऊँची-ऊँची पत्थर की दीवारों से एक अजीब सी नीली और जामुनी रोशनी निकल रही थी। पूरे टेम्पल में एक पावरफुल एनर्जी वाइब्रेट हो रही थी, एक ऐसी एनर्जी जिसे अहान अपनी रगों में बहता हुआ महसूस कर सकता था। वहाँ की हवा में एक भारीपन था, जो किसी भी कमज़ोर इंसान को घुटनों पर ला सकता था, लेकिन अहान वहां पूरी मजबूती और कॉन्फिडेंस के साथ खड़ा था।

अहान का औरा बहुत ही डार्क, इंटेंस और पावरफुल था। उसकी लंबी हाइट, शार्प फीचर्स और आँखों में एक ऐसी गहराई थी जो किसी को भी डरा सकती थी। वह इस मैजिकल वर्ल्ड का सबसे ताकतवर योद्धा था, लेकिन फिर भी, उसके अंदर कुछ खालीपन था। उसकी शक्तियां अभी भी अपने पीक पर नहीं थीं।

उसके सामने ऊंचे से स्टोन प्लेटफॉर्म पर हाई प्रीस्ट खड़े थे। हाई प्रीस्ट की उम्र बहुत ज्यादा थी, लेकिन उनकी आँखों में एक ऐसी चमक और तेज़ था जो सीधे आत्मा के आर-पार देख सकता था। उन्होंने अपनी गहरी और भारी आवाज़ में अहान को घूरते हुए कहा, "तुम्हारी डेस्टिनी में ग्रेटनेस लिखी है, अहान। तुम इस मैजिकल वर्ल्ड के सबसे बड़े रक्षक बन सकते हो।"

हाई प्रीस्ट कुछ पल के लिए रुके, और उनकी आवाज़ में एक सीरियस टोन आ गई, "पर तुम्हारी पावर अभी अधूरी है। तुम्हारा औरा इनकम्प्लीट है। जब तक तुम अपनी मेट को नहीं ढूंढ लेते, तुम्हारी असली शक्तियां कभी अनलॉक नहीं होंगी। तुम्हें ह्यूमन वर्ल्ड में जाना होगा और अपनी उस मेट को ढूँढना होगा।"

यह सुनकर अहान का जबड़ा सख्ती से भिंच गया। उसकी मुट्ठियां तन गईं। उसे ह्यूमन वर्ल्ड और वहां के लोगों से कोई खास लगाव नहीं था। उसके लिए वो दुनिया बहुत ही फ्रैजाइल और अजीब थी। लेकिन वह जानता था कि हाई प्रीस्ट के शब्दों को इग्नोर करना नामुमकिन है।

"और अगर मैं फेल हो गया तो?" अहान ने अपनी भारी और इंटेंस आवाज़ में पूछा, उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। वह हारने वालों में से नहीं था, लेकिन यह मिशन किसी जंग को जीतने जैसा नहीं था। यह किसी अनजान इंसान को एक अनजान दुनिया में ढूंढने का टास्क था।

हाई प्रीस्ट ने अपनी आँखें बंद कीं और एक गहरी सांस लेते हुए बोले, "अगर तुम फेल हो गए, अहान... तो तुम हमेशा के लिए पावरलेस ही रह जाओगे। और उससे भी बुरा यह होगा कि यह जो डार्कनेस हमारी दुनिया के किनारों पर मंडरा रही है, वो पूरी तरह से हमारे इस मैजिकल वर्ल्ड को निगल लेगी। सब कुछ खत्म हो जाएगा।"

पुजारी की चेतावनी मंदिर की दीवारों से टकराकर गूंजने लगी। यह कोई आम वॉर्निंग नहीं थी, बल्कि पूरे मैजिकल वर्ल्ड के सर्वाइवल की बात थी। अहान के अंदर एक आग सी जल उठी। उसका रिज़ॉल्व और भी ज्यादा स्ट्रांग हो गया। वह इस मैजिकल वर्ल्ड की आखिरी उम्मीद था। वह नहीं जानता था कि उसकी मेट कौन है, वह कैसी दिखती है, उसका नाम क्या है या वह उस करोड़ों की आबादी वाले ह्यूमन वर्ल्ड में उसे कैसे ढूंढेगा। लेकिन एक बात वो बहुत अच्छे से जानता था—वह किसी भी कीमत पर फेल नहीं होगा। उसे अपनी डेस्टिनी को पूरा करना ही था।

उसी रात, ह्यूमन वर्ल्ड में, आयशा अपनी बुकस्टोर की शिफ्ट खत्म करके घर वापस लौट रही थी। रात का समय था और सड़कों पर लोगों की अच्छी खासी भीड़ थी। वीकेंड होने की वजह से लोग कैफेज और रेस्टोरेंट्स के बाहर खड़े थे। हर तरफ नियॉन साइनबोर्ड्स की कलरफुल लाइट्स ब्लिंक कर रही थीं और स्ट्रीट फूड की खुशबू हवा में घुली हुई थी।

आयशा ने अपना कोट थोड़ा और कस लिया क्योंकि रात की हवा में हल्की सी ठंडक थी। वह बस अपने हेडफोन्स में सॉफ्ट म्यूजिक सुनते हुए, अपने ही ख्यालों में खोई हुई, फुटपाथ पर चल रही थी। हमेशा की तरह उसे अपने आस-पास के माहौल से कोई खास मतलब नहीं था।

अचानक, उसके सीने में वो अजीब सी सेंसेशन फिर से होने लगी। लेकिन इस बार वह बहुत ज्यादा स्ट्रॉन्ग थी। ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके दिल पर कोई अदृश्य सी डोर बाँध दी हो और उसे ज़ोर से अपनी तरफ खींच रहा हो। यह फीलिंग इतनी अचानक और पावरफुल थी कि आयशा के कदम अपने आप रुक गए। उसने अपने हेडफोन्स नीचे किए और घबराकर अपने आस-पास देखा।

सड़क पर लोग अपनी-अपनी बातों में बिजी थे। गाड़ियां पास से गुज़र रही थीं। कोई भी ऐसा नहीं था जो उसे नोटिस कर रहा हो या कुछ भी अनयूज़ुअल हो। सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल दिख रहा था।

"मुझे क्या हो रहा है?" उसने अपने आप से कहा और अपना हाथ अपने सीने पर रखा, जहाँ उसका दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था। उसने एक लंबी सांस ली और खुद को शांत करने की कोशिश की। शायद यह दिन भर की थकान और एंग्जायटी का नतीजा था। यही सोचकर उसने वापस चलना शुरू कर दिया।

लेकिन जैसे ही उसने मेन रोड से हटकर अपने अपार्टमेंट की तरफ जाने वाली उस शांत और थोड़ी कम रोशनी वाली गली में टर्न लिया, उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ गया।

गली के नुक्कड़ पर, जहाँ स्ट्रीटलाइट की रोशनी खत्म होती है और अंधेरे की शुरुआत होती है, वहां एक आदमी खड़ा था। वह परछाइयों के बीच बिल्कुल शांत और स्थिर खड़ा था, लेकिन उसकी प्रेज़ेंस इतनी भारी और डोमिनेटिंग थी कि हवा का फ्लो भी जैसे वहां आकर रुक गया था।

वह आदमी बहुत लंबा था। उसने डार्क कपड़े पहने हुए थे जो उस गली के अंधेरे में लगभग घुल से गए थे। जैसे ही आयशा ने उसकी तरफ देखा, उस अजनबी ने भी अपना चेहरा हल्का सा उठाया।

उसकी आँखें सीधा आयशा पर लॉक हो गईं। वो एक बहुत ही इंटेंस, गहरी और मैग्नेटिक नज़र थी। उन आँखों में एक ऐसा जादू था, एक ऐसी हिप्नोटिक पावर थी कि आयशा चाहकर भी अपनी नज़रें नहीं हटा पा रही थी।

उस अजनबी को देखते ही, आयशा के सीने में जो वो अनजानी सी कशिश थी, वो मानो किसी ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी। एक पल के लिए उसके दिमाग में सब कुछ ब्लैंक हो गया। उसे ऐसा लगा जैसे वह इस इंसान को जानती है। यह कोई लॉजिकल बात नहीं थी, न ही उसने इस चेहरे को पहले कभी देखा था, लेकिन उसकी सोल, उसकी रूह इस अजनबी को पहचान रही थी।

वह पुल, जिसे वह आज तक समझ नहीं पाई थी, अचानक से पूरी तरह मेक सेंस करने लगा था। वह अजीब सी बेचैनी, वो खालीपन, सब कुछ अचानक से गायब हो गया और उसकी जगह एक अजीब सी एक्साइटमेंट और डर ने ले ली।

वह अहान था। और उसे अपनी मंज़िल मिल गई थी। दोनों के बीच सिर्फ चंद कदमों का फासला था, लेकिन उस एक आई कॉन्टैक्ट ने दो बिल्कुल अलग-अलग दुनियाओं को आपस में टकरा दिया था। और अब दोनों की लाइफ पहले जैसी कभी नहीं रहने वाली थी।

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