पेरिस की उस सर्द और खुशनुमा सुबह में पेंटहाउस के अंदर एक अजीब सा सुकून फैला हुआ था। सूरज की हल्की-हल्की सुनहरी किरणें कांच की विशाल खिड़कियों से छनकर किंग-साइज़ बेड पर पड़ रही थीं। मखमली सफेद रजाई के अंदर आर्यन और काव्या एक-दूसरे की बांहों में पूरी तरह से उलझे हुए थे।
आर्यन वर्मा की आँखें बहुत पहले ही खुल चुकी थीं, लेकिन उसका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपने सीने पर सिर रखकर सो रही अपनी पत्नी पर केंद्रित था। काव्या का चेहरा नींद में इतना मासूम और शांत लग रहा था कि आर्यन को लगा जैसे वो दुनिया का सबसे खूबसूरत नज़ारा देख रहा हो। उसके बाल आर्यन के मस्कुलर और चौड़े सीने पर बिखरे हुए थे, और उसकी हर एक सांस आर्यन की त्वचा पर एक मीठी सी गर्माहट छोड़ रही थी।










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