पेरिस की वो सर्द और खुशनुमा दोपहर अब एक अजीब सी रूमानी शाम में बदल रही थी। कैफे में उस वेट्रेस वाले छोटे से ड्रामे के बाद, आर्यन और काव्या मोंटमार्ट्रे की उन पुरानी, कलात्मक और बेहद खूबसूरत गलियों में बिना किसी मंज़िल के बस यूं ही टहल रहे थे। आर्यन का एक मज़बूत हाथ काव्या की नाज़ुक कमर पर ऐसे टिका हुआ था जैसे वो दुनिया को चीख-चीख कर बता रहा हो कि यह लड़की सिर्फ और सिर्फ उसकी है।
काव्या की आँखें पेरिस की हर एक चीज़ को ऐसे देख रही थीं जैसे कोई बच्चा पहली बार डिज़्नीलैंड (Disneyland) गया हो। सड़क के किनारे गिटार बजाते म्यूज़िशियंस (musicians), ताज़ा बेकरी की वो मीठी महक और आर्यन का वो बेहद पज़ेसिव (possessive) लेकिन प्यार भरा साथ—यह सब काव्या के लिए किसी जन्नत से कम नहीं था।










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