जिस तरह आर्यन सुबह-सुबह गुस्से में मुँह बनाकर घर से बाहर निकला था, सृष्टि को तुरंत पता चल गया था कि उसने ज़रूर काव्या से भी कुछ न कुछ बहुत कड़वा कहा होगा। उन्हें बेचारी काव्या के लिए अंदर से बहुत बुरा लग रहा था।
वो अभी काव्या के कमरे में उसे देखने जाने ही वाली थीं कि तभी उनकी नज़र सीढ़ियों से भारी कदमों से नीचे उतरती काव्या पर पड़ी। उसके उबरे हुए चेहरे को बस एक बार देखकर ही साफ हो गया था—वो बहुत उदास और अंदर तक दुखी थी।









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