मुंबई — ऋचा का घर!!
काव्या ने दरवाज़े की घंटी बजाई और कुछ ही सेकंड में उसकी सबसे अच्छी दोस्त, ऋचा ने दरवाजा खोला। जैसे ही उसने काव्या को इस तरह बेहाल वहां खड़े देखा, उसकी आँखें सदमे से फैल गईं। "काव्या... तुम यहाँ? मुझे तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा... तुम्हें पता है, मैं बस अभी तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी!"









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