जैसे ही आर्यन ने कार को गेट की तरफ मोड़ा, काव्या की आँखों में फिर से आंसू भर आए। उसे अपनी 'पग-फेरे' की रस्म के लिए अपने माता-पिता के घर जाना था, लेकिन आर्यन तो उसे लिए बिना ही अपनी गाड़ी आगे बढ़ा रहा था।
लेकिन जब कार थोड़ा आगे जाकर रुकी, तो काव्या के उदास चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान लौट आई। वो किसी छोटे बच्चे की तरह पल भर में अपने भाव बदल लिया करती थी—वो थी ही ऐसी, कई मायनों में बिल्कुल एक मासूम बच्ची जैसी।









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