रात के 10 बज रहे थे जब वे फ्लैट में दाखिल हुए।
शौमिक ने दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी। उस एक 'क्लिक' की आवाज़ ने तृषा को जितना सुकून दिया, उतना शायद किसी भी चीज़ ने नहीं दिया था। बाहर की दुनिया—पुलिस, गुंडे, मीडिया, नताशा—सब उस दरवाज़े के पीछे छूट गए थे।








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