तुम्हें समझ आ रहा है कि तुम कहाँ जा रही हो? कबीर ने कडक आवाज में पूछा.
तुमसे जितना दूर हो सकूँ उतनी दूर! वह चिल्लाई. कब सीखोगे तुम भरोसा करना? मैं किसी और के साथ नहीं रहना चाहती — हाँ, तुम मुझे पूरी तरह संतुष्ट करते हो. पर तुम हमेशा सेक्स ही क्यों चाहते हो? अब जब तुम मुझ पर बेवजह शक कर रहे हो, फिर भी तुम्हें वही चाहिए. तुम वह किस्म के आदमी हो जो लडाई में ही उत्तेजित हो जाता है.









Write a comment ...