"मिस मल्होत्रा, मेरे सारे होटलों में से यही एक है जो मुनाफ़ा नहीं कमा रहा, तो मुझे कोई वजह नज़र नहीं आती इसे चालू रखने की।"
कबीर ने ठंडी आवाज़ में कहा।
"पैसा ही सब कुछ नहीं होता," समायरा ने नज़रें उसकी तरफ़ टिकाते हुए कहा।
"मेरे लिए होता है," उसने सीधा जवाब दिया, उसकी आँखों में झाँकते हुए।
"कम से कम एक बार सोचिए तो सही... अगर बाकी होटल्स के जितना मुनाफ़ा नहीं भी हो रहा तो भी ये होटल घाटे में नहीं है।"
वो शराब का असर महसूस करने लगी थी।
"क्या तुम ठीक हो?" कबीर ने पूछा जब उसने उसे कुर्सी पर थोड़ा डगमगाते देखा।
"मैं आमतौर पर नहीं पीती... अब असर हो रहा है। मुझे लगता है मुझे अब घर जाना चाहिए, अगर आप बुरा न मानें तो।"
"मैं किसी को भेज देता हूँ तुम्हें घर छोड़ने के लिए।"
"बस वो आदमी नहीं... जो आपके दरवाज़े के बाहर खड़ा रहता है। मुझे अच्छा नहीं लगता वो," समायरा ने डर से आँखें बड़ी करते हुए कहा।
जैसे ही वह उठी, उसके पैर कांपने लगे और वो फिर से बैठ गई।
"हिलना मत," कबीर ने सख्ती से कहा और उठा, "मैं तुम्हारे लिए कॉफ़ी बनाता हूँ, फिर एक cab बुक करवा देता हूँ।"
वो छोटे से किचन में गया, केतली में पानी रखा और कप में कॉफी डाली। जैसे ही पानी उबला, उसने कॉफ़ी बनाई और ले आया।
"मिस मल्होत्रा," उसकी आवाज़ पर समायरा की आंखें खुल गईं। उसने कप लिया और बोली,
"Thankyou।"
"मैं नहीं जानता तुम्हें कैसी पसंद है, इसलिए black ही दी है।"
"कोई बात नहीं," उसने घूंट भरते हुए कहा।
"आराम से पीओ, मैंने cab बुला ली है, जब तैयार हो जाओ तब चली जाना।"
कबीर ने फ़ोन किया और cab की बुकिंग कर दी।
कॉफ़ी का कप पकड़ते हुए उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे, शायद इसलिए क्योंकि कबीर उसे देख रहा था। उसने आधी कॉफ़ी पी और फिर उठ खड़ी हुई।
"अब मैं निकलती हूँ।"
कबीर ने दरवाज़े तक उसे छोड़ा। "तो कल तुम मेरे साथ चलोगी, मैं किसी और को तुम्हारी duty दे दूँगा।
Good night, Miss Malhotra।"
उसने दरवाज़ा तब तक बंद नहीं किया जब तक समायरा बाहर नहीं निकल गई।
20 मिनट बाद cab ने समायरा को उसके छोटे से अपार्टमेंट पर छोड़ दिया। जब वो पैसे देने लगी तो ड्राइवर ने कहा — पेमेंट हो चुका है।"
उसे समझते देर नहीं लगी कि — यह कबीर कपूर की ही तरफ़ से होगा। उसने मन ही मन ठान लिया कि अगली बार वो उसे पैसे वापस करेगी।
वो तीन लड़कियों के साथ एक छोटा सा टू-बेडरूम अपार्टमेंट शेयर करती थी। बाकी लड़कियाँ अक्सर बाहर रहती थीं, इसलिए उसे अकेलेपन की आदत हो गई थी। नियम था कि कोई भी किसी लड़के को रात में लाने की इजाज़त नहीं देगा।
वो अलमारी से रात के कपड़े निकले, फिर nightgown पहनकर बिस्तर पर लेट गई। उसे नींद नहीं आ रही थी।
"कल जब सबको पता चलेगा कि मैं उसके साथ होटल का मुआयना करने जा रही हूँ... वो क्या सोचेंगे?"
क्या वो नफ़रत करेंगे उसे, क्योंकि वो उसके साथ होगी?
पर कबीर ऐसा इंसान था जिससे कोई बहस नहीं कर सकता। वो दबाव बना ही लेता था।
अगली सुबह वह उठी, खुद को ज़बरदस्ती बाथरूम तक घसीटा। गर्म पानी के शावर के नीचे खड़ी सोचने लगी — कैसे वह उस आदमी के साथ पूरा दिन बिताएगी?
जींस और एक बढ़िया टॉप पहनकर, हल्का मेकअप करके वह बस स्टॉप की तरफ़ बढ़ गई।
कबीर के स्वीट पर पहुंचकर उसने दरवाज़ा खटखटाया। वही डरावना बॉडीगार्ड दरवाजा खोलते ही बाहर निकल गया।
वो अंदर खड़ी हो गई। कुछ देर बाद कबीर बाथरूम से निकला — कैजुअल कपड़े, काली पैंट और हल्की नीली शर्ट। जब वो पास आया तो उसके परफ्यूम की महक उसके दिल की धड़कनों को बढ़ा गई।
मिस मल्होत्रा, वक्त पर आई हो — ये अच्छी बात है। पेन और पेपर लाई हो?"
"जी, सर," उसने नज़रें मिला कर कहा।
"Good. Shall we?" उसने उसकी पीठ पर हल्का हाथ रखते हुए बाहर ले गया।
उसका स्पर्श उसे बेचैन कर गया।
"आपका बॉडीगार्ड नहीं आएगा आज?"
"उसे छुट्टी दे दी है। मुझे पता है तुम उससे दिक्कत है। आज बस तुम और मैं हैं, समायरा।
"Ok," उसने राहत की सांस लेते हुए कहा।
"तो शुरू कहाँ से करें?"
Main entrance से शुरू करते हैं। मैं बताऊँगा क्या-क्या बदलना है, अगर तुम्हें कुछ और दिखे तो बताना।"
समायरा ने देखा कि कुछ स्टाफ लोग उन्हें अजीब नज़रों से देख रहे थे। शायद जलन से या शायद नफ़रत से।
कबीर बहुत तेज़ी से चीज़ें बताता जा रहा था — कारपेंटिंग बदलनी है, सोफा पुराने हैं, रंग खराब हो गया है... वो लिखते-लिखते थक गई।
"कोई दिक्कत है?" उसने तीखे लहजे में पूछा।
"बस इतनी कि आप थोड़ा धीरे बोलें... मैं इतनी जल्दी-जल्दी सब नहीं लिख सकती।"
"तो तुम्हें जल्दी लिखना सीखना होगा समायरा। Time is money." उसका लहजा सख़्त था। किचन में दाख़िल होते ही कबीर ने भौंहें चढ़ा लीं। जगह गंदी थी, कूक नॉर्मल कपड़ों में थे।
"ये किचन पूरी तरह बंद होगा सफाई के लिए। हर इंच धोया जाएगा। स्टाफ अब से यूनिफॉर्म पहनेंगे, ये कोई स्ट्रीट साइड रेस्टोरेंट नहीं है।"
उसने एक बर्तन ज़मीन पर गिरा दिया — सब चौंक गए।
"लेकिन गेस्ट का खाना..." समायरा की आवाज़ कांपी।
"उन्हें रेस्टोरेंट वाउचर दो जब तक किचन साफ नहीं हो जाता।"
उसने एक बर्तन उठाया और सारा खाना सिंक में फेंक दिया।
"अब से किचन बंद।"
Mr. Kapoor!" समायरा ने पीछे से आवाज़ दी, "आपको अंदाज़ा है इसका कितना खर्चा होगा? और स्टाफ? सबकी नौकरी..."
"जितनी जल्दी सफाई होगी, उतनी जल्दी वापस काम मिलेगा। और याद रखना — दोबारा मुझे मत टोकना।"
उसकी आँखों की आग से वो कांप गई। "जी समझ गई।"
"चलो, अब रूम चेक करते हैं।"
वो तेज़ी से सब कुछ लिख रही थी। बदलावों की लिस्ट लंबी होती जा रही थी।
अब चिंता ये थी कि कहीं होटल को मरम्मत के दौरान बंद न करना पड़े... क्या कबीर तब भी सैलरीज देता रहेगा?
उसे साहस जुटाकर पूछना होगा।
दोपहर हो गई थी और समायरा को भूख लगने लगी थी। कबीर ने जब लंच का सुझाव दिया, तो उसे नहीं पता था कि वो साथ में खाना खाने जा रहे हैं।
"क्या मैं लंच के बाद वापस यहीं मिलूं?" उसने पूछा।
"नहीं, हम साथ खाएंगे — कुछ डीटेल्स डिस्कस करनी हैं।"
उसने अपनी अपनी कार का दरवाज़ा खोलते हुए इशारा किया — "बैठो।"
वो थोड़ी हिचकिचाई, लेकिन बैठ गई। जब वो उसके पास आकर बैठा तो उनके पैर एक-दूसरे से टकरा गए— समायरा धीरे से खिसक गई।
हिल्टन होटल के बाहर कार रुकी।
"हम यहाँ खाएँगे?"
"कोई दिक्कत?"
"बस... हम ठीक से ड्रेस नहीं हैं।"
"मुझे यहाँ के लोग अच्छे से जानते हैं — कोई दिक्कत नहीं होगी।"
भगवान! कितना घमंडी है ये इंसान। ऐसा लगता है जैसे पूरी दुनिया उसकी सेवा में झुकी हो।
वो दोनों खिड़की के पास की टेबल पर बैठे। कबीर ने "wine" मंगवाई और दोनों के लिए
ऑर्डर भी खुद ही कर दिया।
उसने समायरा से पूछा तक नहीं — जिससे समायरा गुस्से में आ गई।
"मैं मुझे सेल्फिश से एलर्जी है!" उसने तेज़ी से कहा।









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