सुबह के 10 बज रहे थे। शौमिक के बेडरूम में भारी पर्दे गिरे हुए थे, जिससे धूप बमुश्किल अंदर आ पा रही थी।
तृषा ने करवट ली। उसकी आँखें खुलीं तो उसने खुद को एक अनजान छत के नीचे पाया। एक पल के लिए उसे घबराहट हुई, लेकिन फिर उसे अपने कमर पर एक भारी हाथ महसूस हुआ।








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