अगली सुबह जब अलार्म बजा, तो तृषा का सर भारी था।
"Ughhh," वो कराहते हुए उठी। उसकी आंखों के नीचे dark circles थे। पूरी रात वो सो नहीं पाई थी। वजह? वही 'हॉट नेबर' और उसकी 'वाइल्ड नाइट'। बार-बार उसके दिमाग में वो आवाज़ें गूंज रही थीं—बेड की चरमराहट, वो हैवी ब्रीदिंग (heavy breathing)...
"फोकस, तृषा! आज ऑफिस का पहला दिन है," उसने खुद को डांटा।
जल्दी-जल्दी रेडी होकर, एक फॉर्मल शर्ट और ट्राउज़र्स पहनकर वो फ्लैट से निकली। जैसे ही उसने लिफ्ट का बटन दबाया, लिफ्ट का दरवाज़ा खुला।
और सामने वही खड़ा था। शौमिक।
आज वो जिम गियर में था। ब्लैक स्लीवलेस टी-शर्ट, जिसमें उसके बाइसेप्स और टोंड शोल्डर्स साफ दिख रहे थे। पसीने की हल्की चमक उसके चेहरे पर थी, जिससे वो और भी ज्यादा 'appealing' लग रहा था।
"Good Morning," शौमिक ने अपनी उसी गहरी, नशीली आवाज़ में कहा।
तृषा का गला सूख गया। रात वाली इमेजिनेशन फिर से दिमाग में आ गई। वो नज़रे चुराते हुए लिफ्ट में घुसी। "G-Good Morning."
लिफ्ट नीचे जाने लगी। वो छोटी सी जगह तृषा को अचानक बहुत तंग लगने लगी। शौमिक की बॉडी से एक मर्दाना खुशबू आ रही थी—महंगे डियोडरेंट और पसीने का एक अजीब सा नशीला मिक्स।
"काफी टायर्ड लग रही हो," शौमिक ने उसे नोटिस करते हुए कहा। उसकी आंखों में एक शरारत थी या शायद कंसर्न (concern), तृषा समझ नहीं पाई। "रात को नींद नहीं आई क्या?"
तृषा का दिल ज़ोर से धड़का। क्या उसे पता है कि वो सुन रही थी?
"हां... वो... नई जगह है ना, तो एडजस्ट करने में टाइम लगता है," तृषा ने बहाना बनाया, लेकिन मन ही मन सोचा—सोने कहां दिया तुमने और तुम्हारी गर्लफ्रेंड ने?
"हम्म, मुंबई की हवा में ही कुछ ऐसा है। कभी-कभी रातें बहुत लंबी हो जाती हैं," शौमिक ने हल्के से हंसते हुए कहा और लिफ्ट का दरवाज़ा खुलते ही बाहर निकल गया। "Have a good day, Trisha."
तृषा वहीं खड़ी उसे जाते हुए देखती रही। "Damn, he is dangerous."
पूरा दिन ऑफिस में तृषा का ध्यान भटकता रहा। प्रेजेंटेशन देते वक्त भी उसे शौमिक की स्माइल याद आ रही थी। शाम होते-होते मुंबई का मौसम बदल गया। घनघोर काले बादल छा गए और घर पहुँचते-पहुँचते ज़ोरदार बारिश शुरू हो गई।
रात के 8 बजे, तृषा अपने फ्लैट की बालकनी में खड़ी थी। उसके हाथ में कॉफ़ी का मग था। ठंडी हवा चल रही थी और बारिश की बौछारें चेहरे को भिगो रही थीं। ये मौसम बहुत ही 'romantic' था।
तभी बगल वाली बालकनी का स्लाइडिंग डोर (sliding door) खुला।
शौमिक बाहर आया। उसने अब एक व्हाइट लिनन शर्ट और ब्लू जीन्स पहनी थी। हाथ में एक वाइन ग्लास था।
"Hey," उसने तृषा को देखकर स्माइल किया। "मौसम का मज़ा ले रही हो?"
तृषा थोड़ी सकपका गई। "हां, बस कॉफ़ी पी रही थी। मुंबई की बारिश सच में अलग है।"
शौमिक रेलिंग के पास आया। उनकी बालकनी के बीच बस 2-3 फुट का गैप था। वो इतना करीब था कि तृषा उसकी आँखों का रंग देख सकती थी—डार्क ब्राउन।
"तुम्हें पता है," शौमिक ने वाइन का एक घूंट लेते हुए कहा, "ऐसी रातें अकेले गुज़ारना क्राइम होना चाहिए।"
तृषा के गाल लाल हो गए। "क्यों? अकेले भी एन्जॉय किया जा सकता है।"
शौमिक ने अपनी कोहनी रेलिंग पर टिका दी और सीधा तृषा की आँखों में देखा। उसका लुक बहुत इंटेंस (intense) था। "कुछ चीज़ें शेयर करने में ज़्यादा मज़ा आता है, तृषा। जैसे ये बारिश, ये हवा... और शायद कुछ और भी।"
तृषा को लगा जैसे उसके पेट में butterflies उड़ रही हैं। उसका इशारा किस तरफ था?
"वैसे, कल रात के लिए सॉरी," शौमिक अचानक बोला।
तृषा का दिल हलक में आ गया। "क्-क्या? किसलिए?"
"कल रात मेरे घर से शायद थोड़ा शोर आ रहा होगा। मेरी एक... दोस्त आई थी। हम काफी दिनों बाद मिले थे, तो चीज़ें थोड़ी... आउट ऑफ़ कण्ट्रोल (out of control) हो गईं," उसने बिना किसी शर्म के, बड़े ही कैज़ुअल (casual) तरीके से कहा। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो तृषा का रिएक्शन चेक कर रहा हो।
तृषा समझ नहीं पा रही थी कि वो क्या बोले। ये लड़का इतना सीधा और बोल्ड कैसे हो सकता है?
"Oh... मुझे... मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया। मैं गहरी नींद में थी," तृषा ने झूठ बोला, हालांकि उसके लाल गाल सच चीख-चीख कर बता रहे थे।
शौमिक हंसा। वो एक सेक्सी, धीमी हंसी थी। "Good. मैं नहीं चाहता कि मेरी प्यारी पड़ोसन डिस्टर्ब हो। वैसे, अगर आज रात तुम फ्री हो... तो मेरे पास वाइन की एक और बोतल है।"
उसने ऑफर दिया। एक 'romantic night' का ऑफर।
तृषा के दिमाग ने कहा 'ना', लेकिन उसके दिल ने... और उसकी बॉडी ने कुछ और ही सिग्नल दिया। कल रात की वो आवाज़ें, और आज सामने खड़ा ये हैंडसम आदमी।
टेम्पटेशन (temptation) बहुत स्ट्रोंग था।
हवा तेज़ चली और बारिश की बौछार उन दोनों पर गिरी।
"सिर्फ वाइन?" तृषा ने हिम्मत करके पूछा, उसकी आवाज़ थोड़ी कांप रही थी।
शौमिक की स्माइल अब थोड़ी डार्क और सेक्सी हो गई। "फिलहाल तो वाइन... आगे का मूड और मौसम डिसाइड करेगा।"
बिजली कड़की और उस रौशनी में तृषा ने देखा कि शौमिक उसे ऐसे देख रहा था जैसे वो कोई शिकार हो और वो शिकारी।
"ठीक है," तृषा ने धीरे से कहा। "मैं आती हूँ।"
शौमिक ने अपना ग्लास हवा में उठाया। "See you in 5 minutes, Trisha."
तृषा अंदर मुड़ी, उसका दिल अब तक की सबसे तेज़ रफ़्तार में धड़क रहा था। वो शेर की मांद में जा रही थी। और सबसे डरावनी बात ये थी कि... वो वहां जाना चाहती थी।








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