श्रेया की नज़रें फ्लाइट की खिड़की से बाहर झांक रही थीं, लेकिन उसका दिमाग अब भी आरव के शब्दों में उलझा था—"जब उसके बिना अधूरा महसूस होने लगे… तब शायद वह प्यार होता है।"
क्या वह भी कुछ ऐसा ही महसूस कर रही थी?

श्रेया की नज़रें फ्लाइट की खिड़की से बाहर झांक रही थीं, लेकिन उसका दिमाग अब भी आरव के शब्दों में उलझा था—"जब उसके बिना अधूरा महसूस होने लगे… तब शायद वह प्यार होता है।"
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