कमरे में एक अजीब-सी खामोशी छा गई। श्रेया की आँखें अब भी आरव का जवाब तलाश रही थीं, लेकिन वह खुद उलझन में था।
आरव ने हल्की सांस ली और कहा, "श्रेया, यह सब बहुत जल्दी हो रहा है… मैं खुद नहीं जानता कि इस रिश्ते को किस नाम से पुकारूं।"

कमरे में एक अजीब-सी खामोशी छा गई। श्रेया की आँखें अब भी आरव का जवाब तलाश रही थीं, लेकिन वह खुद उलझन में था।
आरव ने हल्की सांस ली और कहा, "श्रेया, यह सब बहुत जल्दी हो रहा है… मैं खुद नहीं जानता कि इस रिश्ते को किस नाम से पुकारूं।"

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