कबीर कपूर का बचपन इटली में बीता, अपने माता-पिता — सुरेश कपूर और काव्या कपूर — के साथ। उनके पिता एक सख़्त और अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे, जिनकी नज़रों में भावनाएं दिखाना कमजोरी की निशानी थी। वह चाहते थे कि कबीर सबसे बेहतर हो — और बाकी लोगों से कहीं ज़्यादा निर्दयी, चालाक और सफल।
प्यार उनके लिए एक कमजोरी थी और औरतें सिर्फ़ किसी पुरुष की फिजिकल सेटिस्फेक्शन के लिए होती हैं। उनकी नज़र में wife एक दिखावे का मुखौटा होती है और असली सुख मिस्ट्रेस से मिलता है। वो पिछले दस सालों से कबीर को किसी अमीर खानदान की लड़की से शादी के लिए कह रहे थे।
कव्या कपूर, कबीर की माँ, ज़्यादा अलग नहीं थीं — ठंडी और भावहीन। कबीर की परवरिश नौकरों और ननियों ने की, जब तक कि वह बोर्डिंग स्कूल जाने लायक़ नहीं हो गया।
पिता के पैसों से कबीर ने अपना "Business Empire" खड़ा किया, लेकिन उनका क़र्ज़ ब्याज के साथ लौटाया। उसने अपना घर शहर से दूर बनवाया ताकि मां-बाप की परछाई भी न पहुंचे। त्योहार, सालगिरह — सब कुछ बस दिखावे का हिस्सा था।
समायरा मल्होत्रा — एक साधारण सी लड़की, अनाथ, जिसने जिंदगी के पहले अठारह साल बेसहारा होकर गुजार दिए। सुनहरे काले बाल और नाज़ुक चेहरा अक्सर उसे दूसरों से अलग बनाता। सोलह की उम्र से ही उसने waitress, babysitter और दूसरे छोटे-मोटे कामों से अपने खर्चे उठाए, और रात में पढ़ाई की।
अठारह की होते ही उसे "Kapoor's Palace"— जो के मुंबई में था — usme 'maid' की नौकरी मिल गई। तीन सालों में वहाँ के बाकी स्टाफ से उसकी दोस्ती हो गई थी — एक तरह का छोटा-सा परिवार।
लेकिन जैसे ही खबर आई कि होटल बंद होने वाला है, सबके चेहरों पर मायूसी छा गई। किसी के पास उम्र ज़्यादा थी, किसी के पास डिग्री नहीं, और नई नौकरी मिलना बहुत मुश्किल था। वैसे भी तनख्वाह कम मिलती थी, ज़्यादातर कमाई टिप से ही होती थी।
फिर खबर आई कि कबीर सर खुद होटल का मुआयना करने आ रहे हैं — ये तय करने कि होटल को बेचना है या नहीं। होटल की हालत खराब थी — कालीन बदले जाने चाहिए, फर्नीचर पुराना हो चुका था, दीवारों को नए पेंट की सख्त ज़रूरत थी। सफाई तो होती थी, लेकिन चमक गायब थी।
स्टाफ ने एक मीटिंग की, सोच-विचार किया कि कबीर सर को कैसे मनाया जाए कि होटल न बेचें। समायरा और कुछ दूसरी maids ने "Penthouse Sweet" को चमका दिया — होटल का सबसे बेहतरीन कमरा। कबीर की पसंदीदा wine और sharab पहले से स्टॉक करके रख दी गई थी।
सब लोग बेचैनी से उसका इंतज़ार कर रहे थे। उन सबने उनके बारे में कहानियाँ सुनी थीं — और उनके चेहरे पर डर बिल्कुल साफ दिख रहा था।
जिस दिन वो आया, पूरा माहौल जैसे रुक गया हो। दरवाज़े से अंदर आते ही हर बातचीत थम गई। लंबा कद, घने काले बाल, और तेज़ चाल — एक ऐसा इंसान जो न डरता है, न डर दिखाने की ज़रूरत समझता है।
समायरा ने सुना था कि वो सिर्फ़ उनतीस साल का है — इतनी छोटी उम्र में भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक। सूट के पीछे से भी उसकी मजबूत काया झलक रही थी। लेकिन चेहरा — ऐसा जैसे कोई गैंगस्टर हो, फिल्मी डॉन जैसा — खौफनाक और बेरहम।
उसके साथ एक और आदमी था — हट्टा-कट्टा, आँखों पर काले चश्मे, चेहरे पर एक लंबा चीरा। वो और भी ज़्यादा डरावना लग रहा था।
जैसे ही वो रिसेप्शन की तरफ़ बढ़ा, रिसेप्शनिस्ट के हाथ काँप गए। उसने चाभी दी, पर वो कुछ बोले बिना चुपचाप लिफ्ट की ओर बढ़ गए। एक पल के लिए कबीर की गहरी नज़र समायरा से मिली—उसमें सिहरन दौड़ गई।
एक घंटे बाद सभी कर्मचारियों को "Ballroom" में बुलाया गया। सब एक-दूसरे से फुसफुसा रहे थे, लेकिन जैसे ही कबीर कमरे में दाखिल हुआ — सब खामोश हो गए। उसका रौब करीब से और भी भारी लग रहा था।
उसने ठहरी हुई आवाज़ में कहा,
"मैंने यह पिटीशन पढ़ी है। और मेरा फ़ैसला है — होटल बंद हो रहा है।"
उसने पिटीशन को फाड़ा और ज़मीन पर फेंक दिया।
सबकी आंखें फैल गईं — सन्नाटा।
जैसे ही वह जाने को मुड़ा, समायरा की आवाज़ गूंजी —
"ये गलत है! आपने हमारी बात सुनी भी नहीं!"
वह पलटा। "किसने कहा ये?"
कोई नहीं बोला। तभी एक दूसरी 'maid' — संध्या ने समायरा को आगे धकेल दिया।
"तुम। पास आओ," उसने इशारा किया।
समायरा डरते हुए सामने आई।
"तुम्हारा नाम?"
"समायरा मल्होत्रा... सर," उसने धीरे से कहा।
"उम्र?"
"इक्कीस साल।"
"तुम बच्ची लगती हो, मुश्किल से अठारह की।"
"मैं बच्ची नहीं हूँ!" — पहली बार उसने तीखा जवाब दिया।
"काम क्या है यहाँ?"
"मैं maid हूँ।"
"तो अब से तुम ही मेरा कमरा साफ करोगी। मैं रोज़ सुबह सात बजे उठता हूँ, आठ बजे बाथरूम साफ होना चाहिए। एक मिनट की देरी हुई, तो नौकरी चली जाएगी। वैसे भी ज़्यादा दिन नहीं बचें।"
समायरा की आंखें नम होने लगीं।
"क्या आप हमारी बात भी नहीं सुनेंगे?" उसने हिम्मत करके पूछा।
"मैं फ़ैसला एक बार करता हूँ, तो बदलता नहीं," उसने बाकी कर्मचारियों से कहा, "अब काम पर लग जाओ, वरना सबकी छुट्टी।"
उस रात समायरा सो नहीं सकी। उसकी आँखों में वही ठंडी नज़रों वाली झलक घूमती रही। लेकिन एक उम्मीद थी — अगर वो बात करे तो शायद कबीर सुन ले।
अगली सुबह वो ठीक 8 बजे पहुँची। बाहर उसका बॉडीगार्ड खड़ा था।
"मुझे अंदर जाना है, वो मेरा इंतज़ार कर रहे हैं।"
"पहले तलाशी लेनी होगी," उसने कहा और दीवार से टिकाकर समायरा की तलाशी करने लगा। जब उसने उसका हाथ ड्रेस के नीचे ले जाने की कोशिश की, तो समायरा ने उसे धक्का दे दिया।
"तुम जा सकती हो," उसने हंसते हुए कहा।
कमरे में घुसकर समायरा ने आँखें पोंछीं। तभी कबीर सामने आया — बिना शर्ट, बस पैंट पहने हुए।
"अब बाथरूम साफ करो।"
वो जाने लगी, लेकिन उसने उसका हाथ पकड़ लिया।
"क्या हुआ? तुम रो क्यों रही हो?"
"आपके बॉडीगार्ड ने मुझे छुआ, तलाशी के नाम पर।"
"उसका काम है मेरी सुरक्षा।
जब कोई तुम्हारे पैरों के बीच हाथ ले जाए तो आप ये नहीं कह सकते कि ये तलाशी है।"
"मैं उससे बात करूंगा। अब से ऐसा नहीं होगा। मैं अपनी जुबान देता हूं।"
बाथरूम साफ करने के बाद समायरा दूसरे कमरे में चली गई — लेकिन फिर शिफ्ट खत्म होते ही खबर आई — कबीर ने उसे अपने sweet में बुलाया है। डरते-डरते वो ऊपर पहुँची, लेकिन बॉडीगार्ड ने तलाशी नहीं ली, बस दरवाज़ा खोला।
कबीर कुर्सी पर बैठा था, हाथ में Drink लिए।
"तुम्हें बुलाया था। बैठो।"
वो चुपचाप बैठ गई।
"पिओगी कुछ?"
"नहीं।"
"पता है तुम्हें क्यों बुलाया?"
"नहीं।"
"मुझे पूरे होटल का ओवरव्यू चाहिए — क्या-क्या टूट चुका है, क्या नया लाना होगा, क्या मरम्मत की ज़रूरत है। ये सब तुम नोट करोगी, कॉल करोगी, काम करवाओगी।"
"लेकिन मैं? मैं तो सिर्फ़ साफ-सफाई करती हूँ।"
"बाकी लोग डरपोक निकले — सिर्फ़ तुमने मुझसे बात की और तुम्हारे पास कोई choice नहीं है।"
"और मेरी सफाई का काम?"
"कोई और करेगा। अब ये बताओ — होटल को बचाना तुम्हारे लिए इतना ज़रूरी क्यों है?"
वो सोच में डूबी, और अचानक whiskey का ग्लास उठाकर का एक लंबा घूंट लिया।
"ये होटल हमारे घर जैसा है। हमारे Regular Clients हमें जानते हैं, और हम उन्हें। यहाँ काम करने वाले लोग इस जगह से
जुड़े हुए हैं — किसी के लिए ये रोज़ी है, किसी के लिए परिवार। बस थोड़ी मरम्मत की ज़रूरत है। लेकिन इसे बंद करना — ये सही नहीं होगा।"









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