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Chapter 1: इश्क का नशा

दोस्तों Pocket Tales आपके लिए लेकर आया है,

एक बिल्कुल नई कहानी। तो बढ़ते हैं कहानी के पहले एपिसोड में आगे।

"Get Ready my sweetheart, Just a minute."

ये बोलकर अंजलि ने ध्रुव को गाल पर किस किया और वॉशरूम चली गई। उसके जाते ही ध्रुव ने जल्दी से होटल रूम का दरवाजा बंद किया। उसने अपनी शर्ट के बटन्स ओपन किए और आराम से बेड पर बैठकर उसका इंतजार करने लगा।

कुछ ही मिनटों में अंजलि वॉशरूम से बाहर आई। उस शॉर्ट और रिवीलिंग ड्रेस में वो बहुत ही सेक्सी और हॉट लग रही थी। उसे देखकर ध्रुव तो क्या, कोई भी लड़का उसके पीछे पागल हो जाता। ध्रुव बेड से उतरकर उसके करीब जाने लगा। अंजलि भी उसकी तरफ बढ़ रही थी।

उसके एकदम पास आकर ध्रुव ने कमर से उसे पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया।

वो दोनों इतने करीब थे कि दोनों को एक दूसरे की साँसें तक सुनाई दे रही थीं। ध्रुव ने उसे अपनी बाहों में उठाया, बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसके बालों को हटाते हुए उसकी गर्दन पर किस करने लगा।

अंजलि भी उस पल को एन्जॉय कर रही थी। कुछ ही पलों में उसके गालों पर किस करते हुए ध्रुव ने उसके होठों पर किस किया।

​ध्रुव के होठों का स्पर्श पाते ही अंजलि के बदन में एक सिहरन दौड़ गई। वह किस सिर्फ एक स्पर्श नहीं था, बल्कि बरसों की चाहत का इकरार था। कमरे में एसी की ठंडक के बावजूद, उन दोनों के बीच की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी। ध्रुव ने अपनी उंगलियां अंजलि के रेशमी बालों में फंसा दीं और उसे और भी शिद्दत से चूमने लगा। अंजलि ने भी अपनी आंखें मूंद लीं और खुद को पूरी तरह से ध्रुव के हवाले कर दिया। उसकी बाहें कसकर ध्रुव की पीठ पर लिपट गईं, जैसे वह उसे कभी खुद से दूर नहीं जाने देना चाहती हो।

​ध्रुव ने धीरे से अपने होंठ अलग किए, लेकिन वह अभी भी उसके चेहरे के बेहद करीब था। उसकी गर्म सांसें अंजलि के चेहरे से टकरा रही थीं। उसने अंजलि की आंखों में देखा, जिनमें इस वक्त सिर्फ और सिर्फ नशा और समर्पण था।

​"तुम आज कहर ढा रही हो, अंजलि," ध्रुव ने भारी और मदहोश आवाज में कहा, उसकी नज़रें अंजलि की ड्रेस के डीप नेकलाइन से होते हुए वापस उसकी नशीली आंखों पर आ टिकिन्। "मेरा बस चले तो मैं तुम्हें अपनी बाहों में कैद कर लूं, हमेशा के लिए।"

​अंजलि के गाल शर्म और उत्तेजना से लाल हो गए थे। उसने धीरे से ध्रुव का कान अपने दांतों से हल्का सा दबाया और फुसफुसाई, "तो रोका किसने है ध्रुव? मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ... आज की रात और हर रात।"

​यह सुनना था कि ध्रुव का संयम टूटने लगा। उसने अंजलि की कमर को और कसकर पकड़ा। अंजलि की सिसकी निकल गई, जो कमरे की खामोशी में गूंज उठी। ध्रुव का हाथ उसकी ड्रेस के किनारे से ऊपर की ओर सरकने लगा, उसकी मखमली त्वचा को महसूस करते हुए। अंजलि का पूरा शरीर कांप उठा। उसने अपनी पीठ को थोड़ा ऊपर उठाया, ध्रुव के स्पर्श को और गहराई से महसूस करने के लिए।

​कमरे का माहौल बेहद रोमांटिक और इंटेंस हो चुका था। ध्रुव अब उसकी गर्दन के नाजुक हिस्से पर अपने होठों से निशान बना रहा था, जिससे अंजलि के मुंह से आहें निकल रही थीं। वो दोनों दुनिया जहान को भूलकर बस एक-दूसरे में खो जाना चाहते थे। ध्रुव ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और बेड के पास लगी लाइट को डिम कर दिया, जिससे कमरे में एक हल्की सुनहरी रोशनी रह गई।

​तभी, कमरे की शांति को चीरते हुए अचानक अंजलि के फोन की घंटी बज उठी।

​वो आवाज़ इतनी तेज़ और अचानक थी कि दोनों एकदम से ठिठक गए। ध्रुव ने झुंझलाहट में अपना माथा अंजलि के कंधे पर टिका दिया। "इग्नोर इट," उसने दबी आवाज़ में कहा और दोबारा अंजलि की ओर बढ़ा।

​अंजलि भी उस पल को खोना नहीं चाहती थी, उसने फोन को अनदेखा करने की कोशिश की। लेकिन फोन लगातार बजता रहा। एक बार कटने के बाद, वह तुरंत दोबारा बजने लगा।

​ध्रुव थोड़ा पीछे हुआ, उसकी आँखों में अधूरी प्यास साफ़ दिख रही थी। "शायद कुछ ज़रूरी है," उसने बेमन से कहा।

​अंजलि ने एक लंबी साँस ली, अपने बिखरे बालों को ठीक किया और बेड के साइड टेबल पर रखे अपने पर्स से फोन निकाला। स्क्रीन पर चमकता नाम देखकर उसके चेहरे के भाव एकदम बदल गए। जो चेहरा कुछ पल पहले इश्क़ के नूर से चमक रहा था, वहां अब एक अजीब सी घबराहट और शिकन आ गई थी।

​उसने ध्रुव की तरफ देखा, जो उसे ही देख रहा था।

​"किसका फोन है?" ध्रुव ने उसकी परेशानी भांपते हुए पूछा।

​अंजलि ने फोन साइलेंट किया और स्क्रीन को पलट कर रख दिया। "कोई... कोई नहीं, बस ऑफिस से है," उसने झूठ बोला, लेकिन उसकी आवाज़ का कांपना ध्रुव से छुप न सका। उसने दोबारा ध्रुव की ओर हाथ बढ़ाया, "छोड़ो ना, हम कहाँ थे?"

​ध्रुव ने उसका हाथ तो थाम लिया, लेकिन उसकी नज़रों में अब सवाल थे। वह जानता था कि ऑफिस का कॉल अंजलि को इतना परेशान नहीं कर सकता। हवा में जो रोमांस था, उसमें अब रहस्य की एक हल्की सी परत घुल गई थी।

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