आरव तेज़ कदमों से श्रेया के केबिन की ओर बढ़ रहा था। चारों तरफ अजीब सी फुसफुसाहट थी, मानो कुछ बड़ा हो गया हो। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, अंदर का माहौल गंभीर था।
श्रेया अपनी कुर्सी पर बैठी थी, सामने कुछ वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, और टेबल पर कुछ दस्तावेज रखे हुए थे।









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