आरव अपनी कुर्सी पर बैठकर फाइल के पन्ने पलट रहा था, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल घूम रहा था—"क्या मैं वाकई इस दुनिया का हिस्सा बन सकता हूँ?"
तभी आदित्य ने कहा, "सर, आपकी पहली मीटिंग एक घंटे बाद है। यह एक क्लाइंट प्रजेंटेशन है।"

आरव अपनी कुर्सी पर बैठकर फाइल के पन्ने पलट रहा था, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल घूम रहा था—"क्या मैं वाकई इस दुनिया का हिस्सा बन सकता हूँ?"
तभी आदित्य ने कहा, "सर, आपकी पहली मीटिंग एक घंटे बाद है। यह एक क्लाइंट प्रजेंटेशन है।"

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