मुंबई की रातें कभी नहीं सोती थीं, लेकिन आरव शर्मा के लिए रातें सिर्फ ज़रूरतें पूरी करने का ज़रिया थीं। काली हुडी और जींस में लिपटा, वह अपनी डिलीवरी बाइक को भीड़भाड़ वाली सड़कों पर बड़ी कुशलता से दौड़ा रहा था। एक ऑर्डर पूरा होता, दूसरा आ जाता। उसकी ज़िंदगी बस इसी चक्र में फंसी थी— शाम को पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय, रात में कैब ड्राइवर, और सुबह कैफ़े में पार्ट-टाइम नौकरी।
कभी वह अपने सपनों का पीछा करता था—कॉलेज का टॉपर, लेकिन हालात ने उसे ज़िंदगी के असली रंग दिखा दिए थे। पैसों की तंगी ने उसे मजबूर कर दिया था कि वह अपने करियर के बजाय जीविका कमाने पर ध्यान दे।
आज भी वही सिलसिला था। उसने अपनी बाइक एक लक्ज़री होटल के बाहर रोकी और मोबाइल पर ऑर्डर देखा— "पेंटहाउस सुइट – मेहरा इंडस्ट्रीज़ टॉवर"
"अमीर लोग और उनकी आधी रात की भूख," वह मन ही मन बुदबुदाया, फिर गर्मागर्म पैकेट उठाकर होटल के अंदर चला गया।
श्रेया मेहरा परेशान थी।
उसे अपने दादा के "एक महीने में शादी करो" वाले अल्टीमेटम से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था।
उसकी असिस्टेंट रिया ने उसे अमीर और मशहूर लोगों की एक लिस्ट दी थी—बड़े बिजनेस टाइकून, नेता, यहाँ तक कि फिल्मी सितारे भी।
लेकिन श्रेया ने सबको ठुकरा दिया।
"मुझे पति नहीं चाहिए, मुझे आज़ादी चाहिए।"
पर भूख किसी तर्क से नहीं हारती।
डोरबेल बजी।
उसने झुंझलाते हुए दरवाज़ा खोला।
आरव सामने खड़ा था।
उसके हाथ में फूड डिलीवरी पैकेट था, लेकिन उसकी नज़रें इस बात से अधिक चौकन्नी थीं कि वह किसके सामने खड़ा है।
एक सेकंड के लिए, दोनों ने एक-दूसरे को बिना कुछ कहे देखा।
श्रेया को उम्मीद थी कि कोई वेल-ड्रेस्ड होटल स्टाफ दरवाज़े पर खड़ा होगा, लेकिन उसके सामने यह साधारण कपड़े पहने एक युवक था, जिसकी आँखों में आत्मसम्मान की एक अलग चमक थी।
आरव, जिसने हमेशा मेहरा इंडस्ट्रीज़ के बारे में सुना था, कभी सोच भी नहीं सकता था कि वह खुद देश की सबसे ताकतवर महिला के सामने खड़ा होगा।
"डिलीवरी फॉर मिस श्रेया मेहरा?" उसने सामान्य आवाज़ में कहा।
श्रेया ने बिना ज्यादा ध्यान दिए सिर हिलाया, पैकेट लिया, और दरवाज़ा बंद करने ही वाली थी कि—
"मैम, पेमेंट अभी बाकी है।"
श्रेया ने भौंहें चढ़ाईं। "मैंने ऑनलाइन पेमेंट किया था।"
आरव ने अपने फोन में चेक किया—ट्रांजैक्शन फेल्ड।
श्रेया ने झुंझलाते हुए मेज से कुछ ₹500 के नोट उठाए और उसकी तरफ बढ़ा दिए।
"रख लो," उसने ठंडे स्वर में कहा।
आरव ने बिना हिले-डुले कहा, "मैं बिना वजह एक्स्ट्रा पैसे नहीं लेता।"
श्रेया ने हैरानी से उसे देखा। अजीब लड़का है। ज़्यादातर लोग तो खुशी-खुशी टिप ले लेते हैं।
"ठीक है," उसने उतने ही पैसे उसके हाथ में थमाए, जितने का खाना था, और दरवाज़ा बंद कर दिया।
आरव हल्के से मुस्कुराया। अमीर लोगों के पास पैसा बहुत होता है, पर सब्र नहीं।
पर दोनों इस बात से अनजान थे— यह छोटी-सी मुलाकात उनकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी।
🌟 कहानी यहीं खत्म नहीं होती… 🌟
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